जीवन रेखा और विदेश यात्रा का रहस्य
हस्तरेखा शास्त्र में जीवन रेखा व्यक्ति के स्वास्थ्य, ऊर्जा और जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं का सूचक मानी जाती है। यह रेखा सामान्यतः अंगूठे के चारों ओर अर्धवृत्ताकार रूप में चलती है, लेकिन कई बार इसके अंत में विशेष प्रकार की शाखाएँ दिखाई देती हैं, जिनका गहरा महत्व होता है।
जीवन रेखा का अंत और उसकी शाखाएँ
यदि आपकी हथेली पर जीवन रेखा अपने अंत में दो भागों में विभाजित होती हुई दिखाई दे —
एक शाखा शुक्र पर्वत की ओर जाती हो
और दूसरी चंद्र पर्वत की ओर बढ़ती हो
तो यह योग आपके जीवन में लंबी विदेश यात्राओं का एक प्रबल संकेत माना जाता है।
जब यह शाखा चंद्र पर्वत की ओर बढ़ते-बढ़ते मणिबंध (कलाई) तक पहुँच जाती है, तो यह स्थिति और भी विशेष मानी जाती है। इसका अर्थ है कि व्यक्ति अपने जीवन का अधिकांश समय विदेश में बिताता है। इतना ही नहीं, कई बार यह संकेत विदेशी नागरिकता प्राप्त करने की संभावना तक दिखाता है।
चंद्र क्षेत्र की ओर जाने वाली यह शाखा जितनी अधिक स्पष्ट, गहरी और मज़बूत होगी, आपकी विदेश यात्रा उतनी ही सुखद और सफल होगी। यह दर्शाता है कि यात्रा केवल होने भर की नहीं, बल्कि जीवन में लाभ और उपलब्धियाँ भी लेकर आएगी।
अशुभ चिह्नों से सावधान
हालाँकि, यदि इस शाखा पर द्वीप (Island), क्रॉस, तिल या अन्य रुकावट जैसे चिन्ह बने हों, तो यह शुभ नहीं माना जाता। ऐसे चिह्न इस बात के संकेतक हैं कि विदेश यात्रा में बाधाएँ आ सकती हैं, या यात्रा अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाएगी।
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