Saturday, June 27, 2026

"क्या केवल पंचम भाव देखकर संतान सुख का निर्णय किया जा सकता है? आखिर किन-किन ज्योतिषीय नियमों का गहराई से अध्ययन आवश्यक होता है?

संतान सुख का विचार करते समय निम्नलिखित बिंदुओं का गहन अध्ययन करना चाहिए

पंचम भाव पर स्थित ग्रहों की युति एवं दृष्टि का विचार।

पंचमेश की नवांश कुंडली में स्थिति।

पंचमेश का षड्बल एवं दिग्बल।

पंचम भाव पर शुभ कर्तरी योग का प्रभाव है अथवा नहीं।

उपर्युक्त सभी बिंदुओं का विचार नवम भाव एवं नवमेश के संबंध में भी समान रूप से करें।

पंचम भाव के नक्षत्र स्वामी की स्थिति— वह सबल है या निर्बल।

गुरु ग्रह की स्थिति, बल तथा उस पर पड़ने वाली युति एवं दृष्टियाँ।

नवम भाव एवं नवमेश की शक्ति का सम्यक् मूल्यांकन।

सर्वाष्टक वर्ग में पंचम भाव को प्राप्त कुल अंक तथा पंचमेश को प्राप्त अंक।


संतान प्राप्ति के लिए दशा–अंतरदशा का विचार

पंचम भाव के नक्षत्रेश,

पंचमेश, उनके नक्षत्र स्वामी, 

गुरु तथा गुरु के नक्षत्र स्वामी 

सप्तमांश (D-7) कुंडली के लग्नेश एवं पंचमेश की स्थिति, बल तथा उन पर शुभ ग्रहों की युति एवं दृष्टि का विचार।

जिन ग्रहों का पंचम भाव, पंचमेश, गुरु तथा सप्तमांश कुंडली के लग्नेश एवं पंचमेश से अनुकूल संबंध (युति एवं दृष्टि) हो, उनका भी विशेष रूप से मूल्यांकन करना चाहिए।

तत्पश्चात, इनमें जो भी बली अवस्था में हों उन्हीं की दशा अंतर्दशा में संतान सम्बन्धी सुख मिलने की सम्भावना रहती हैI


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