दोस्तों,
ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की स्थिति हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव डालती है। इनमें से एक विशेष योग है दिग्बल। यह वह स्थिति है जब कोई ग्रह अपनी दिशा में स्थित होकर अपनी पूरी शक्ति के साथ फल प्रदान करता है। आज हम समझेंगे कि दिग्बली ग्रह (Digbali Grah) क्या होते हैं, ये किन दिशाओं में सबसे शक्तिशाली माने जाते हैं और इनके प्रभाव से जीवन में कैसी चमत्कारिक उन्नति हो सकती है।
दिग्बल क्या है?
‘दिग’ का अर्थ होता है दिशा और ‘बल’ का मतलब है शक्ति। जब कोई ग्रह किसी विशेष दिशा में स्थित होकर अपनी ऊर्जा को पूरी तरह प्रकट करता है, तो उसे दिग्बली ग्रह कहा जाता है।
कौन-सा ग्रह किस दिशा में दिग्बली होता है?
ज्योतिष के अनुसार अलग-अलग भावों (Houses) में ग्रह दिग्बली माने जाते हैं:
लग्न (प्रथम भाव) → बुध और गुरु
चतुर्थ भाव → चंद्रमा और शुक्र
सप्तम भाव → शनि
दशम भाव → सूर्य और मंगल
इन भावों में ग्रह सबसे अधिक शक्तिशाली बन जाते हैं और जातक को विशेष लाभ प्रदान करते हैं।
दिग्बली ग्रहों के जीवन पर प्रभाव
जन्मकुंडली में दिग्बली ग्रह होने का अर्थ है कि जातक के जीवन में—
बुद्धिमानी और क्षमता, प्रशासनिक सेवाओं या सरकारी कार्यों में सफलता, नेतृत्व और उच्च पद, सामाजिक प्रतिष्ठा और सम्मान, , सुख-संपत्ति और भौतिक वैभव आसानी से प्राप्त हो सकता है।
जब एक से अधिक ग्रह हों दिग्बली
यदि कुंडली में दो या अधिक ग्रह दिग्बली हों और साथ ही अपनी उच्च या स्वराशि में भी हों, तो जातक प्रायः राजसी कुल में जन्म लेता है या फिर उसके जन्म के बाद परिवार में समृद्धि और यश की प्राप्ति होती है।
यदि चार या उससे अधिक ग्रह दिग्बली हों, तो जातक चाहे सामान्य परिवार में जन्मा हो, वह अपने क्षेत्र में निश्चित रूप से शीर्ष स्थान (Top Position) प्राप्त करता है। यह क्षेत्र राजनीति, प्रशासनिक सेवा या कॉर्पोरेट सेक्टर कोई भी हो सकता है।
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