Wednesday, October 8, 2025

“षष्ठ भाव का स्वामी एकादश भाव में — समृद्धि और सावधानी का संगम”

नमस्कार,
आज हम वैदिक ज्योतिष के अंतर्गत एक ऐसे विशेष और रहस्यमयी योग की बात करने जा रहे हैं, जिसका सीधा संबंध जन्मकुंडली के छठे और ग्यारहवें भाव से है।

 दोस्तों,  जिन जातकों की कुंडली में षष्ठ भाव का स्वामी एकादश भाव में स्थित होता है, उनके जीवन में यह योग धन, ऐश्वर्य और सम्पन्नता प्रदान करने वाला सिद्ध हो सकता है। लेकिन दोस्तों, यह योग जितना शुभ दिखता है, उतना ही यह चेतावनी देने वाला और चुनौतीपूर्ण भी होता है।

ऐसे जातकों को अक्सर अपने कार्यस्थल, समाज या परिवार में शत्रुओं और ईर्ष्यालु लोगों का सामना करना पड़ सकता है। विशेष रूप से जब छठे भाव का स्वामी ग्रह सूर्य, मंगल या शनि हों — अर्थात जब षष्ठ भाव में मेष, सिंह, वृश्चिक, मकर या कुंभ राशि स्थित हो।

ऐसी स्थिति व्यक्ति को धोखाधड़ी, षड्यंत्र और गुप्त शत्रुओं का शिकार बना सकती है। परिणामस्वरूप उसे आर्थिक और मानसिक दोनों प्रकार की हानियाँ झेलनी पड़ती हैं, और यदि सावधानी न बरती जाए तो कभी-कभी जीवन संकट में भी पड़ सकता है।

इस योग में क्या करें और क्या न करें

यदि आपकी कुंडली में यह योग विद्यमान है, तो आपको सदा सतर्क रहना चाहिए।
किसी पर भी आंख मूंदकर भरोसा न करें और किसी प्रकार की साझेदारी या पार्टनरशिप में अत्यधिक सावधानी बरतें।

आपके लिए सबसे सही कदम यही होगा कि अपने आसपास के लोगों की गतिविधियों का समय-समय पर आकलन करें, विशेषकर उन लोगों का जो आपके लिए नए या अपरिचित हैं और अचानक आपसे संपर्क स्थापित करना चाहते हैं।

ऐसे हर व्यक्ति को समझने और परखने के बाद ही उन पर विश्वास करें या किसी निर्णय को अंतिम रूप दें — क्योंकि इस योग में एक छोटी-सी चूक भी बड़े नुकसान का कारण बन सकती है।
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