नाड़ी दोष निवारण (उपाय)
यदि वर और वधू की राशि समान हो, लेकिन नक्षत्र भिन्न हों, तो नाड़ी दोष समाप्त हो जाता है।
यदि दोनों का नक्षत्र समान हो, लेकिन राशियाँ अलग-अलग हों, तो भी नाड़ी दोष का परिहार संभव है और विवाह किया जा सकता है।
यदि वर और वधू की राशि तथा नक्षत्र दोनों समान हों, लेकिन नक्षत्र के चरण (पाद) अलग-अलग हों, तो भी परिहार संभव है और विवाह किया जा सकता है।
एक मत के अनुसार यदि वर और वधू का जन्म रोहिणी, आर्द्रा, मृगशिरा, कृत्तिका, पुष्य, ज्येष्ठा, श्रवण, उत्तराभाद्रपद, रेवती नक्षत्रों में हुआ हो, तो नाड़ी दोष समाप्त माना जाता है और विवाह किया जा सकता है।
भकूट दोष (निवारण/विचार)
वर-वधू की राशियों के स्वामी (राशि स्वामी ग्रह) में समानता होनी चाहिए।
यदि राशि स्वामी समान न हों, तो उनके नवांश स्वामी (नवांशपति) समान या परस्पर मित्र होने चाहिए।
वर और वधू का जन्म नक्षत्र समान होना भी दोष निवारण में सहायक माना जाता है।
राशियों में परस्पर अनुकूलता होनी चाहिए, अर्थात वधू की राशि, वर की राशि के अनुकूल हो।
यदि किसी प्रकार का परिहार संभव न हो, तो कम से कम 20 गुण मिलना आवश्यक है तथा नाड़ी की शुद्धता (नाड़ी दोष का अभाव) अत्यंत आवश्यक मानी जाती है।
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